भारत में समय समय पर कई जासूसी फिल्में बनती रही है, जिन्हे फिल्मकार दर्शकों के सामने अपने देशी मसालों में लपेटकर पेश करते रहे है। कई बार इनकी कहानियाँ हॉलिवुड की जेम्स बॉन्ड फिल्मों से प्रेरित होती है। इसी सिलसिले में याद आती है, 1968 में आई धर्मेन्द्र और माला सिन्हा की एक ब्लॉकबस्टर फिल्म Aankhen movie 1968. आज आपको इस फिल्म से बनने से लेकर रिलीज होने तक की फिल्म से जुड़ी सभी घटनाएं बताएंगे।
⭐ धर्मेंद्र कैसे बने Aankhen 1968 के हीरो?
दरअसल कहानी की शुरुआत होती है फिल्म Aarzoo की रिलीज़ के बाद, जब निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर ने एक स्पाई थ्रिलर बनाने की योजना बनाई। उनके बेटे प्रेम सागर के साथ मिलकर उन्होंने फिल्म के हीरो की तलाश शुरू की।
एक दिन वो दोनों दादर के कोहिनूर सिनेमा में फिल्म Shola Aur Shabnam देखने गए। इस फिल्म के हीरो धर्मेन्द्र थे, जो उस समय न्युकमर थे, और अपनी मजबूत कद काठी और ऐक्टिंग से दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए थे।
रामानंद सागर ने उस समय धर्मेन्द्र को पहली दफा देखा था, उनको देखते ही रामानंद सागर ने फैसला कर लिया कि उनकी अगली फिल्म में वही हीरो होंगे। धर्मेन्द्र के मजबूत हाथों को देखकर रामानंद सागर सोचने लगे कि जब ये हाथ पिस्टल पकड़ेंगे तो पर्दे पर कयामत ही आ जाएगी। इस तरह धर्मेन्द्र Aankhen 1968 फिल्म के लिए चुने गए।

राजकुमार ने क्यों मना किया?
एक किस्सा ये भी मशहूर है कि पहले आँखें फिल्म के लिए राजकुमार साहब को भी पूछा गया था, लेकिन उन्होंने ये कहते हुए मना कर दिया, कि इस फिल्म को तो मेरा कुत्ता भी करना पसंद नहीं करेगा। हालांकि यए सुनी सुनाई बातें है, इसकी पुष्टि करना मुश्किल है। Aankhen hindi movie 1968 Facts Video
🐅 शूटिंग के दौरान बाघिन उमा देवी का आतंक
फिल्म का एक सीन है जिसमें धर्मेन्द्र को पिंजरे में कैद दिखाया जाता है। और बाहर एक बाघ पहरेदारी के लिए तैनात होता है। इस सीन के लिए असल में एक बाघिन को लाया गया था, जिसका नाम उमा देवी था। अचानक शूटिंग के दौरान लाइटों से परेशान होकर उमा देवी केमरे की तरफ झपटी, और सेट पर हड़कंप मच गया। सौभाग्य से कैमरामैन और धर्मेंद्र दोनों पिंजरे में थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बाद में काफी मशक्कत के बाद बाघिन को काबू में किया गया।

🇯🇵 जापान की शूटिंग से जुड़े 3 मजेदार किस्से
- फिल्म को भव्य बनाने के लिए रामानंद सागर ने इसकी शूटिंग ईरान, हांगकांग और जापान में की थी। जब यूनिट के लोग जापान में शूटिंग करने गए, तब जापान सरकार ने उनको एक सरकारी टूरिस्ट गाइड दिया, जो कराटे में ब्लेक बेल्ट था। एक दिन धर्मेन्द्र जापान के बुद्ध मंदिर के पास शूटिंग कर रहे थे, वहाँ पर एक कृत्रिम झरने से धर्मेन्द्र को लकड़ी के पात्र से पानी पीना था। लेकिन धर्मेन्द्र जब इस सीन की शूटिंग कर रहे थे तो वहा के एक पुजारी ने हंगामा खड़ा कर दिया। अचानक वो टूरिस्ट गाइड जो यूनिट के साथ बस में बैठ था, भागता हुआ आया और एक फ्लाइंग कीक पुजारी को दे मारी। यूनिट के लोग ये देखकर हैरान रह गए, क्योंकि ये बिल्कुल फिल्मी नजारा लग रहा था।

- जापान में ही एक मसाज पार्लर का किस्सा जुड़ा है, दरअसल धर्मेन्द्र और फिल्म के प्रोडक्शन कंट्रोलर रंगीन साहब जापान में मसाज कराने गए, वहाँ उनको उम्मीद थी,कि कोई खूबसूरत जापानी लड़की उनको मसाज देगी। लेकिन जब मसाज शुरू हुई तो वहाँ पर एक पहलवान जैसी जापानी महिला आई, और उसने मसाज करना शुरू कर दिया। मसाज इतनी जोरदार थी, कि धर्मेन्द्र जी की चीखे निकल गई, और उनके साथियों ने बाद में उनका खूब मजाक उड़ाया।
- इसी तरह एक पब वाला किस्सा भी काफी चर्चित हुआ था, दरअसल शूटिंग पूरी होने के बाद धर्मेन्द्र और उनके यूनिट के कुछ लोग जापान के एक पब में गए। वहाँ पर धर्मेन्द्र को हरे कपड़ों में एक बेहद खूबसूरत जापानी लड़की मिली। उन्होंने तुरंत उसे अपने साथ ड्रिंक करने का ऑफर दिया। धर्मेन्द्र और उनके साथी लड़की को देखकर देर रात तक खूब शराब पीते रहे। बाद में जब बिल आया, तो उनके होश उड़ गए। बिल बहुत भारी था। जब वो होटल लौटे तो पता चला कि वो लड़की असल में पब की तरफ से तैनात की गई थी, दरअसल वो खुद शराब नहीं बल्कि पानी पी रही थी, लेकिन ग्राहकों को पिलाकर भारी बिल बनवाने का काम कर रही थी।
🇮🇷 ईरान में शूटिंग और फकीरों का किस्सा
ईरान की राजधानी तेहरान में फिल्म के बेहद लोकप्रिय गीत “तुझको रखें राम, तुझको अल्लाह रखें” की शूटिंग हुई थी। इस शूटिंग के लिए महमूद और धूमल को फकीरों का गेटअप दिया गया। एक शाम शूटिंग के बाद यूनिट के कुछ शरारती लोगों ने एक मज़ेदार योजना बनाई और महमूद और धूमल को होटल के गेट पर बैठा दिया और खुद श्रद्धालु बनकर उनके आगे झुकने लगे। धीरे-धीरे वहा पर कुछ विदेशी लोग भी उन दोनों से आशीर्वाद लेने लगे, लोगों को लगा कि ये दोनों असली फकीर हैं। लोगों ने चढ़ावे के तौर पर डॉलर रखने शुरू कर दिए और कुछ ही घंटों में वहाँ डॉलरों का ढेर लग गया । इस तरह यूनिट ने कुछ पैसे कमाए और बाद में उन पैसों को आपस में बाँट लिया।

🎵 Aankhen 1968 songs – आज भी हिट
फिल्म की कहानी जितनी जबरदस्त थी, उतने सी शानदार इसके गाने थे। फिल्म का संगीत रवि शंकर शर्मा ने तैयार किया था, और कुल 6 गाने इसके म्यूजिक अल्बम में रखे गए थे। फिल्म के प्रमुख गाने थे, “गैरों पे करम अपनों पे सितम”, “मिलती है ज़िंदगी में मोहबत कभी कभी”, “तुझको रखे राम तुझको अल्लाह रखे”, “लूट जा लूट जा”, “मेरी सुनले आज” और “उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता”। इन गानों को लता मंगेशकर, मन्ना डे, आशा भोसले, कमल बरोट, उषा मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से सजाया था।
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⚡ Aankhen film 1968 क्लाइमैक्स शूटिंग और नोटिस
एक दिन महमूद साहब किसी कारणवश स्टूडियो से चले गए। यह बात जब रामानंद सागर को पता चली तो उन्हे बहुत बुरा लगा और उन्होंने महमूद को लीगल नोटिस भिजवा दिया। नोटिस मिलते ही महमूद भागते हुए स्टूडियो पहुंचे और शूटिंग में सहयोग का वादा किया।
🎥 Aankhen movie 1968 – फिल्म की सफलता और प्रभाव
फिल्म की शूटिंग काफी लंबी खींची और इसका क्लाइमैक्स शूट होना बाकी रह गया था, बावजूद इसके डिस्ट्रीब्यूटर्स ने फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर दी। रामानंद सागर ने इस फिल्म में काफी पैसा और संसाधन लगा रखे थे। उन्होंने फिल्म यूनिट को सख्त निर्देश दे रखा था कि दिन-रात मेहनत करके क्लाइमैक्स की सेटिंग पूरी करनी है। रामानंद सागर खुद डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठे-बैठे झपकियाँ लेते रहते थे, पर काम चलते रहता था। इस तरह यूनिट ने दिन रात मेहनत करके फिल्म के क्लाइमैक्स की शूटिंग पूरी की, और फिल्म तय समय पर ही रिलीज हुई।
फिल्म से जुड़े किस्सों का विडिओ देखने के लिए नीचे विडिओ को चलाए