रेस्टोरेंट में Vikram Bhatt की ये गलती… जानिए वेटर से क्यों मांगनी पड़ी माफ़ी? Vikram Bhatt Biography

बॉलीवुड के जाने माने प्रोड्यूसर और डायरेक्टर Vikram Bhatt को भला कौन नहीं जानता? इन्होंने Raaz, 1920, Haunted, और Shaapit जैसी Horror फिल्में देकर बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। विक्रम भट्ट ने अपनी ज़िंदगी में जीतने उतार चढ़ाव देखे है, शायद किसी और फिलममेकर ने नहीं देखे। बॉलीवुड में भले ही वो भूतिया फिल्में बनाने के लिए जाने जाते है लेकिन इस प्रोड्यूसर की जिंदगी की असल कहानी उनकी फिल्मों से कही ज्यादा भावनात्मक है। आज हम विक्रम भट्ट की ज़िंदगी से जुड़ा एक ऐसा रोचक किस्सा बताएंगे, जो उनके लिए उनकी किसी मूवी सीन से भी ज्यादा असरदार साबित हुआ था। 

रेस्टोरेंट की वो घटना

ये बात साल 2007 की है, जब विक्रम भट्ट अपने दोस्तों के साथ एक होटल में खाना खाने गए थे। उनका मन इटैलियन खाना, खासकर Risotto खाने का था। जिन लोगों को Risotto के बारे में नहीं पता उन्हे बता दूँ की Risotto एक क्रीमी राइस डिश होती है, जो एकदम सॉफ्ट, क्रीमी और फ्लेवर से भरपूर होती है। इसे ऑलिव ऑइल, प्याज, चीज, सफेद वाइन, और कई जगह पर चिकेन मिलाकर बनाया जाता है। 

जब विक्रम भट्ट होटल पहुंचे तो उन्हे देखकर होटल का शेफ खुद उनका ऑर्डर लेने पहुच गया। ऑर्डर लेने के बाद जब डिश विक्रम भट्ट के सामने पेश की गई, और जब पहला निवाला मुहँ में गया, तो विक्रम भट्ट बहुत नाराज हुए। वो जिस तरह का Risotto खाना चाहते थे, शेफ़ ने वैसा बनाया नहीं।
भूख लगी थी, इसलिए उन्होंने उसे खाना शुरू कर दिया, तभी एक वेटर उनके पास आया और विनम्रता से बोला, “सर खाना कैसा लगा?”

उसकी बात सुनकर विक्रम भट्ट ने कुछ ऐसा रिएक्ट किया, कि वहाँ मौजूद सब लोग हंस पड़े। लेकिन ये बात उस वेटर के दिल पर जाकर लगी, उसकी आँखों में नमी थी। वो चुपचाप वहाँ से चला गया। और यहीं से शुरू हुई वो याद, जिसने विक्रम भट्ट को उनके शुरुआती दिनों में पहुँच दिया। 

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पुराने दिन याद आ गए

विक्रम भट्ट ने साल 2007 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इन्टरव्यू में कही थी। उन्होंने बताया कि उस दिन वहाँ उस वेटर को उदास देखकर उन्हे अपने शुरुआती दिनों की याद आ गई, जब वो मशहूर डायरेक्टर Mukul Anand के असिस्टेंट के तौर पर काम किया करते थे। 

मुकुल आनंद बहुत चिड़चिड़े और गुस्सेल आदमी थे। छोटी छोटी बातों पर अपने असिस्टेंट पर चिल्ला दिया करता था। विक्रम भट्ट ने आगे बताया कि एक बार जुहू की सड़कों पर किसी फिल्म की शूटिंग हो रही थी, विक्रम भट्ट से एक छोटी सी गलती हो गई, और मुकुल आनंद ने मेगाफोन उठाकर सबके सामने उन्हे डांटना शुरू कर दिया। 

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विक्रम भट्ट वहाँ खड़े 300 से ज्यादा जूनियर आर्टिस्ट और पब्लिक के सामने खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे।

उस दिन वो इतने निराश और टूट गए थे, कि एक कार के पीछे जाकर छिप गए, उनकी आँखों में आँसू थे। और खुद से सवाल पूछ रहे थे, कि वो ये सब क्यों झेल रहा है?

तभी उसे याद आया, और उसने खुद से कहा, कि अगर उसे डायरेक्टर बनना है, तो ये सब झेलना ही पड़ेगा। इसी वजह से वो मुकुल आनंद के साथ रहते हैं। ताकि वो उनके साथ रहकर फिल्ममेकिंग सीख सके।

यह कुछ वैसा ही है जैसे 8th Central Pay Commission 2026 salary calculator सरकार कर्मचारियों के लिए आने वाले बदलावों का हिसाब रखता है। विक्रम को भी अपनी मेहनत और संघर्ष का फल आगे जाकर मिलना था, जैसे किसी कर्मचारी को उनके कड़े प्रयासों के बाद सैलरी रिवीजन में फायदा होता है।

Vikram Bhatt का फिल्मी सफर 

इन्ही कठिन अनुभवों के बाद विक्रम भट्ट ने जो हासिल किया, वो प्रेरणा के प्रतीक है। उन्होंने अपने दर्द को अपनी कला में डाला, उनकी फिल्मों में वो डर और इमोशन दिखाई देता है जो उन्होंने खुद महसूस किया था। अपने करियर में उन्होंने 55 से भी ज्यादा फिल्मे बनाई है। उनकी कुछ प्रमुख फिल्मे है….

सालVikram Bhatt Movieजॉनर
1998GhulamAction / Drama
2001KasoorSuspense / Thriller
2002RaazHorror / Mystery
20081920Horror / Romance
2011Haunted 3DSupernatural Horror
2012Raaz 3Psychological Horror
20181921Horror / Love Story

 

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ज़िंदगी की सीख

Vikram Bhatt आगे उस इन्टरव्यू में बताते है कि कोई भी व्यक्ति बिना इजाजत आपकी बेइज्ज़ती नहीं कर सकता। लोग आपकी मजबूरियों को अपनी ताकत समझ लेते है। एक स्टूडेंट कॉलेज में रैगिंग झेलता है, क्योंकि उसे डिग्री लेनी है.  एक कर्मचारी ऑफिस में अपने बॉस के ताने सुनता है, क्योंकि उसे अपना घर चलाना है। इसी तरह फिल्म लाइन में भी होता है। अगर सपने पूरे करने है तो ये सब झेलना ही पड़ता है। उस वेटर की भी ऐसी ही मजबूरी थी, इसलिए वो उनकी बात चुपचाप सह गया। 

वेटर से माफी मांगी

होटल से निकलते वक्त विक्रम भट्ट को अपनी बातें याद आ गई, उन्होंने उस वेटर को अपने पास बुलाया और उनसे माफी मांगी। वेटर ये देखकर हैरान था, लेकिन विक्रम भट्ट बताते है कि उनसे माफी मांगना मेरी जरूरत थी। 

उस दिन इंसानियत जीत गई, बिक्रम भट्ट की ये कहानी ये बताती है कि सफलता का अर्थ सिर्फ नाम या शोहरत नहीं है, बल्कि इंसानियत को जिंदा रखना ही असली सफलता है। दोस्तों आपको विक्रम भट्ट की ये कहानी कैसी लगी? नीचे कमेन्ट जरूर करें। 

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