धर्मेंद्र की पहली फिल्म: “दिल भी तेरा हम भी तेरे” कैसे बनी? पूरी अनसुनी कहानी!

एक वक्त था जब बॉलीवुड में धर्मेन्द्र का सिक्का चलता था। और लाखों लोग उनकी ऐक्टिंग के दीवाने हुआ करते थे। उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़ डाले थे। लेकिन क्या आप ये जानते है? कि बॉलीवुड में धर्मेन्द्र की एंट्री कैसे हुई थी? धर्मेंद्र की पहली फिल्म कौनसी थी, जिससे उन्होंने बतौर हीरो अपने करियर की शुरुआत की थी? अगर नहीं पता तो बता दे, कि धर्मेन्द्र ने साल 1960 में फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से बतौर हीरो शुरुआत की थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र, बलराज साहनी, कुमकुम, उषा किरण, मोहन चोटी और हरी शिवदास पुरी जैसे कलाकार नजर आए थे।

आज हम जानेंगे Dharmendra Ki Pahli Film दिल भी तेरा हम भी तेरे के बनने की बहुत सारी अनसुनी और अनकही बातें।

बचपन से ही था हीरो बनने का जुनून

जब इंटरनेट की पहुच लोगों तक नहीं थी, तब धर्मेन्द्र को लेकर एक गलत कहानी लोगों के बीच प्रचलित थी, कि धर्मेन्द्र जब खेतों में ट्यूबवेल से पानी दे रहे थे, तब वो भागकर मुंबई फिल्मों में काम करने आ गए थे। लेकिन ये कहानी बिल्कुल गलत है। दरअसल बता दे कि धर्मेन्द्र को स्कूल के दिनों से ही फिल्मों से इतना लगाव था, कि उन्होंने श्याम और सुरैया की 1949 में आई फिल्म दिल्लगी कोई 40-50 बार देखी थी। धर्मेन्द्र स्कूल जाने के बजाए अक्सर सिनेमा हॉल पहुँच जाते थे। इसलिए उन्होंने शुरू में ही सोच लिया था कि एक दिन वो भी ऐक्टर बनेगा और फिल्मों में काम करेगा।

19 साल की उम्र में धर्मेन्द्र की शादी प्रकाश कौर से हो गई थी। और तब तक धर्मेन्द्र रेलवे में कलर्क की नोकरी भी मिल गई थी, जहां से उन्हे 125 रुपए तनख्वाह मिलती थी। लेकिन धर्मेन्द्र का मन नोकरी में नहीं लगता था, उनको तो बस किसी भी तरह मुंबई पहुचकर हीरो बनना था।

मुंबई में कॉमपीटीशन जीता, लेकिन फिल्म नहीं मिली

1954 के आसपास की बात है। धर्मेन्द्र को पता चला कि मुंबई में फिल्मफेयर मेगजीन एक कॉमपीटीसन करवा रही है। जिसे जीतने वाले को फिल्मों में काम करने का मौका मिलेगा। बस फिर क्या था? धर्मेन्द्र मुंबई आ गए। और यहाँ आकर उन्होंने कॉमपीटीसन जीत लिया। लेकिन compitition जीतने के बाद भी उन्हे काम मिलना किसी मुसीबत से कम नहीं था। क्योंकि शर्त के मुताबिक उन्हे काम नहीं मिला।

धर्मेन्द्र को मुंबई में रहने के लिए भी जगह नहीं मिली। कई बार तो उन्हे भूखे रहकर रेलवे स्टेशन पर रात बितानी पड़ी। वे दर-दर स्टूडियो के चक्कर लगाते रहते। कई बार स्टूडियो के बाहर उनकी टक्कर डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी से हो जाती थी, जो शुरू में खुद भी हीरो बनने ही आए थे, लेकिन बात नहीं बन सकी और उन्होंने डायरेक्शन में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।

ऐसे मिली धर्मेन्द्र को पहली फिल्म

अपने एक इंटरव्यू में अर्जुन हिंगोरानी ने बताया था, कि एक दिन ऐसे ही उनकी टक्कर धर्मेन्द्र से हो गई, और उनके मुहँ से निकल गया, कि अब वो हीरो बनने नहीं, बल्कि डायरेक्टर बनने की ट्राइ कर रहे है। अगर कोई फिल्म मिलती है, तो उसमें लीड हीरो वो धर्मेन्द्र को ही लेंगे। हालांकि धर्मेन्द्र को तब उनकी बात मजाक लग रही थी, और तब तक वो अर्जुन हिंगोरानी को ठीक से जानते भी नहीं थे।

ये कोई 1959 के आसपास की बात है। अर्जुन हिंगोरानी को एक फिल्म मिली, तो उन्होंने वादे के मुताबिक तुरंत धर्मेन्द्र को फिल्म में कास्ट कर लिया। ये फिल्म थी, “दिल भी तेरा हम भी तेरे”। और इस फिल्म के लिए धर्मेन्द्र को जब 51 रुपए साइनिंग अमाउन्ट दिया गया, तो धर्मेंद्र की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बस फिर इस तरह से अर्जुन हिंगोरानी और धर्मेंद्र के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी। और पूरे करियर में अर्जुन हिंगोरानी की ऐसी कोई फिल्म नहीं आई जिसमे धर्मेंद्र ना हो।

धर्मेन्द्र की पहली हिरोइन कुमकुम

फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में धर्मेन्द्र के साथ अभिनेत्री कुमकुम ने काम किया था। जो की तब तक कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुकी थी। और उन्हें क्लासिकल फिल्मों के दौर की टॉप एक्ट्रेस माना जाता था। इसलिए कुमकुम को लेकर धर्मेंद्र बताते थे, कि उनके करियर में ही नहीं, बल्कि जिंदगी में भी कुमकुम का अहम रोल रहा था। उन्होंने कुमकुम से ही सीखा था, कि न्यूकमर से किस तरह पेश आना चाहिए, और रिश्तों की कद्र कैसे करनी चाहिए। इसलिए वह कभी नहीं भूल पाए कि कुमकुम उनके प्रति कितनी दयालु थी। उन्होंने मुझे घर जैसा महसूस कराया। शूटिंग के दौरान मेरी मदद की। मेरी जिंदगी में दिलचस्पी दिखाई और यहां तक कि मेरे और मेरे परिवार के बारे में भी बात की। इसीलिए वह सारी जिंदगी कुमकुम के आभारी रहे।

फिल्म के गाने हुए थे हिट

फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में संगीत कल्याण जी आनंद जी ने दिया था। और गानों को के. एल. परदेसी, शमीम जयपुरी, अख्तर रोमानी और शकील नोमिन ने लिखा था। फिल्म में टोटल 10 गाने रखे गए थे। फिल्म का संगीत बेहद ही अच्छा था। जिनमें मुकेश और लता मंगेशकर का गाया हुआ “यह वादा करें”, “मुझे इस रात की तन्हाई में”, “क्या बुरा किया है हुजूर मैंने”, और महेंद्र कपूर और गीता दत्त का गाया हुआ “आदमी गरीब हो या अमीर हो” सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले गाने रहे हैं। 

धर्मेन्द्र की पहली फिल्म फ्लॉप क्यों हुई?

आपको बता दे कि फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” के सिर्फ हीरो और डायरेक्टर ही नए नहीं थी, बल्कि आइल प्रोड्यूसर भी नए थे। इस वजह से फिल्म का बजट भी बहुत कम करीब 4 लाख रुपए रखा गया था। लेकिन फिल्म 4 लाख भी नहीं कमा पाई, और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। हालांकि तब धर्मेन्द्र की ऐक्टिंग ने लोगों को इंप्रेस जरूर किया था।

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