Dharmendra Death: ही-मैन का अंतिम सफर, बायोग्राफी, करियर, विवाद और अनसुनी कहानियाँ

Dharmendra Death: बॉलीवुड में He-Man के नाम से मशहूर धर्मेन्द्र, अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार 24 नवंबर को उन्होंने अपने जुहू स्थित घर में अंतिम सांस ली। अभिनेता लंबे समय से बीमार चल रहे थे। अभिनेता को 12 नवंबर को ही ब्रिज कैंडी हॉस्पिटल से परिवार के कहने पर डिस्चार्ज किया गया था। इसके बाद से घर पर ही उनका इलाज चल रहा था। धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार विले पार्ले स्थित पवनहंस श्मशान घाट में किया गया है। इस दौरान पूरा देओल परिवार और कई सिनेमाई दिग्गज नजर आए। बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र को मुखाग्नि उनके बड़े बेटे सनी देओल ने दी है। आइए जानते हैं धर्मेंद्र के जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।

जन्म, बचपन और परिवार

धर्मेन्द्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा के नसराली गांव में एक सिख परिवार में हुआ था। उनका पैतृक गांव लुधियाना के पास डांगो था। उनके पिता किशन सिंह देओल गांव के सरकारी स्कूल में हेड मास्टर थे, और उनकी मां का नाम सतवंत कौर था। धर्मेन्द्र की स्कूली शिक्षा लुधियाना के ललतों कलां के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और फगवाड़ा के रामगढ़िया कॉलेज में हुई। बचपन से ही धर्मेंद्र का मन पढ़ाई लिखाई में कम और सिनेमा में ज्यादा लगता था। इसी वजह से वो अपने दोस्तों के साथ मीलों दूर चलकर फिल्म देखने जाते थे। वे दिलीप कुमार के बहुत बड़े फैन थे।

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शुरुआती जिंदगी और पहला संघर्ष

1954 में मात्र 19 साल की उम्र में धर्मेंद्र की शादी प्रकाश कौर से हो गई थी। इस शादी से उन्हें चार बच्चे हुए। दो बेटे- सनी देओल और बॉबी देओल। वहीं दो बेटियां- विजेता और अजीता। बचपन के इसी फिल्मी जुनून ने उन्हें मुंबई जाने के लिए प्रेरित किया। उन दिनों फिल्मफेयर पत्रिका द्वारा एक न्यू टैलेंट हंट प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। 1958 में धर्मेंद्र ने इसमें पार्टिसिपेट किया और पंजाब के हजारों प्रतियोगियों को पीछे छोड़ते हुए इस प्रतियोगिता को जीत लिया। इस जीत ने उन्हें मुंबई का टिकट और फिल्म निर्माताओं से मिलने का मौका दिया। लेकिन ये यात्रा आसान नहीं थी। मुंबई में शुरुआती दिनों में उन्हे काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्हें कई रातों तक बेंच पर सोना पड़ा। और कभी-कभी तो चने खाकर गुजारा करना पड़ा। उनके पास ना कोई Godfather था, और ना ही फिल्मी दुनिया की कोई अंदरूनी जानकारी। वो स्टूडियो दर स्टूडियो भटकते रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

करियर की शुरुआत और पहला मौका

अपने आकर्षक व्यक्तित्व और मर्दाना लुक के बावजूद उन्हें काम पाने में मुश्किल हुई। और आखिरकार 1960 में फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से उन्हें अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने का मौका मिला। ये धर्मेन्द्र की पहली फिल्म थी। हालांकि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं कर पाई। लेकिन धर्मेंद्र की एक्टिंग ने कुछ समीक्षकों का ध्यान जरूर खींचा। इसके बाद उन्होंने कुछ और फिल्मों में काम किया। जिनमें शहीद, अनपढ़ और बंदिनी जैसी फिल्में शामिल थी। विमल रॉय की बंदिनी में नूतन के साथ उनके काम को सराहा गया और इससे उन्हें इंडस्ट्री में थोड़ी पहचान मिली।

Stardom का असली आगाज़: फूल और पत्थर (1966)

धर्मेंद्र के करियर का टर्निंग पॉइंट 1966 में आई फिल्म ‘फूल और पत्थर’ थी। इस फिल्म में उन्होंने पहली बार एक एक्शन हीरो की भूमिका निभाई, जिनमें उनका शर्टलेस लुक और दमदार एक्शन दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और रातोंरात धर्मेंद्र एक स्टार बन गए। उन्हें He-Man और गरम धर्म जैसे नाम मिले। इस सफलता के बाद धर्मेंद्र ने एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और गंभीर किरदारों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

धर्मेंद्र की 5 Iconic फिल्में जिन्होंने इतिहास लिख दिया

70 के दशक में धर्मेंद्र का बॉक्स ऑफिस पर एकछत्र राज हुआ करता था। उन्होंने एक साल में नौ हिट फिल्में देने का रिकॉर्ड बनाया था। उनकी कुछ प्रमुख सुपरहिट फिल्में ये है-

(1) सत्यकाम (1969)

ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने एक आदर्शवादी व्यक्ति का किरदार निभाया था। इसे उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ अभिनय प्रस्तुतियों में से माना जाता है।

(2) मेरा गांव मेरा देश (1971)

एक डकैत विरोधी एक्शन फिल्म जिसने उनकी एक्शन हीरो की छवि को और मजबूत किया।

(3) जुगनू (1973)

यह भी एक बड़ी हिट फिल्म थी और इस फिल्म ने उन्हें सबसे अधिक फीस लेने वाले अभिनेताओं में से एक बना दिया था।

(4) चुपके-चुपके (1975)

इस फिल्म में धर्मेन्द्र ने कॉमेडी में उनकी महारत का सबूत दिया था। इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों का दिल जीत लिया था।

(5) शोले (1975)

भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक वीरू और जय की दोस्ती और बसंती के साथ उनके रोमांस ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। शोले फिल्म से जुड़े किस्से जानने के लिए यहाँ क्लिक करे।

पर्दे के पीछे की अनसुनी बातें

  • धर्मेंद्र ने खुद स्वीकार किया था कि एक समय उन्हें शराब पीने की बहुत बुरी आदत थी। शोले के सेट पर एक मशहूर किस्सा है। जहां एक सीन शूट करते समय जिसमें उन्हें हेमा मालिनी से बात करनी थी। वह बार-बार शॉट खराब कर रहे थे। बाद में पता चला कि वह कैमरामैन के स्टॉक से चुपके से शराब पी रहे थे। उन्होंने अपनी इस आदत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और बाद में इससे उभरने की कोशिश की।
  • धर्मेंद्र पहले से ही शादीशुदा थे और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दूसरी शादी नहीं कर सकते थे। वजह थी कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर को तलाक नहीं दिया था। लेकिन जब वो ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी के प्यार में पड़े तो उन्होंने उनसे शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपना लिया। यह उस समय एक बड़ा विवाद बन गया था। लेकिन उन्होंने हेमा मालिनी से 2 मई 1980 को शादी कर ली। इस शादी से उनकी दो बेटियां हुई। ईशा देओल और अहाना देओल।
  • बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि धर्मेन्द्र शोले फिल्म में गब्बर सिंह का किरदार निभाना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि हेमा मालिनी बसंती का किरदार निभा रही है तो वह तुरंत वीरू का रोल करने के लिए तैयार हो गए ताकि वो उनके साथ स्क्रीन शेयर कर सके।

राजनीति का सफर

फिल्मों के अलावा धर्मेन्द्र ने राजनीति में भी हाथ आजमाया था। वे 2004 के आम चुनाओं में भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर राजस्थान के बीकानेर से लोकसभा सांसद चुने गए थे।

आखिरी दिन – तबीयत क्यों खराब हुई?

बता दे की 89 साल की उम्र में धर्मेन्द्र दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी तबीयत बार बार खराब हो रही थी। महीने भर पहले ही उनको सांस लेने में दिक्कत की वजह से मुंबई के ब्रिज केंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। मगर शायद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। इसीलिए घरवाले उनको वेंटिलेटर पर घर ले आए थे। बताया तो ये भी जा रहा था कि उनकी सेहत में सुधार हो रहा है, लेकिन अंदर की बात कोई नहीं जनता था। और आखिर वही हुआ किसका शक था। 24 नवंबर की सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, और उनका निधन हो गया।

धर्मेन्द्र जी का जाना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक युग का अंत है। उन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं की बल्कि करोड़ों दिलों में अपनी अमीट छाप छोड़ी है। आज उनका जाना हमें यही याद दिलाता है कि असली सितारे सिर्फ पर्दे पर नहीं चमकते, बल्कि लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं। हम दिल से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनकी बनाई हुई यह सुनहरी विरासत हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे।

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